ॐ शांति | अच्छा लगा आप राजयोग सेंटर से तीन महीने से जुड़े हुए है। यह जो प्रकाश का अनुभव हुआ है आपको, वह आपको अपनी आत्मा का अभ्यास हुया है | आत्मा एक प्रकाश का पुंज, एक सितारे के तरह है जो अपने शरीर की भृकुटि के मध्य रहती | साधना के दौरान आत्मा के प्रकाश का अनुभव होता है| सब कुछ ठीक है | आप साधना में आगे बढ़ रहे है | अच्छे संकेत है | परन्तु हमेशा इसकी इच्छा न करे क्योंकि यदि आगे ऐसा न हुया तो आप निराशा में बह जाएंगे और यही आपकी साधना के लिए रुकावट है | आगे नए नए अनुभव होंगे | अपनी साधना जारी रखें | आगे के अभ्यास में आप अपने आप को आत्मा समझ शरीर के भृकुटि के मध्य रहने वाले एक सितारे की भाँती शक्ति हो, इस तरह के स्वमान में रहने का अभ्यास करना है और साक्षी भाव हो कर अपनी ज्ञानिन्दिर्यों और कर्मन्द्रियों को प्रयोग में लाये |
मैं आशा करता हूँ की आपको इस उत्तर से संतुष्टि हुयी होगी. | यदि आगे कुछ जानने चाहते है, तो आपका स्वागत है |